• Shubha Khadke

"जटिल समस्या - सामूहिक प्रयास" - स्थायी बदलाव के प्रबंधन के लिए सिस्टम्स थिंकिंग


हाल के वर्षों में सिस्टम्स थिंकिंग जैसा दृष्टिकोण बहुत तेज़ी से बढ़ा है। सिस्टम्स थिंकिंग वास्तव में एक एप्रोच है, एक तरीका है, जटिल समस्यायों को समग्र रूप से समझने और सम्मिलित रूप से उसका हल खोजने का। इस एप्रोच के हिसाब से कोई भी तंत्र उसके सम्पूर्ण रूप में ही देखा जाना चाहिए, केवल उसके हिस्सों के जोड़ के रूप में नहीं। इसी सोच को भोजन या खाद्य प्रणाली में टिकाऊ बदलाव के परिपेक्ष्य में देखने के लिए इरमा और सौक्रेटस फाउंडेशन ने मिलकर तीन दिवसीय प्रबंधन कार्यक्रम का आयोजन १३ अक्टूबर से १५ अक्टूबर तक किया। इस कार्यक्रम में देश भर के विकास के क्षेत्र में काम करने वाले 20 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।


कार्यशाला का उद्देश्य - मैं से हम सभी तक का सफर


कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लोगों को सामूहिक रूप से सोचने के लिए प्रेरित करना था, जोकी प्रबंधन कार्यक्रम का विषयगत क्षेत्र, फ़ूड सिस्टम यानी, खाद्य प्रणाली "लिविंग फार्म इनकम" में हमारी परियोजना के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। लिविंग फार्म इनकम टीम विभिन्न सामाजिक संगठनों और अनुसंधान संगठनों को एक साथ लाने और खाद्य प्रणाली में स्थायी बदलाव को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है। सही अर्थों में कार्यशाला की योजना तीन दिनों में ' I to We to Us (मैं से हम से हम सभी)' तक पहुंचना था, यानी व्यक्तिगत क्षमताओं को सामने लाने, अपनी सीखों को बड़े समूह के साथ साझा करना और अंत में उन्हें सामूहिक क्षमताओं के रूप में सामने लाना था।



गंभीरा कोआपरेटिव - समस्या समाधान का सामूहिक प्रयास


सत्र की शुरुआत जटिल समस्याओं (wicked problems) पर चर्चा के साथ हुई। कई ऐसी जटिल समस्याएं है जिनके समाधान आसान नहीं है। उसके लिए सामूहिक ज्ञान/बुद्धि की आवश्यकता है। इसी सन्दर्भ को केंद्र में रखकर एक खेल जो गंभीरा कोआपरेटिव पर आधारित है, खेला गया। इस खेल का सृजन प्रोफेसर तुषार शाह और नीरज गर्ग जी ने किया है। खेल वास्तव में रुचिकर था। इसमें प्रतिभागियों को गांव के २० किसानो में बाँटा गया, उनके परिवार, ज़मीन और मवेशियों के विवरण पहले से ही उन्हें दे दिए गए। इसके बाद खेल शुरू हुआ। खेल में ऋतु के अनुसार बीज, खाद और उत्पाद की अंतिम कीमत की घोषणा की गई। छोटे किसान ऋण के बोझ से दब गए, वही बड़े किसानों को मजदूर नहीं मिले। एक वर्ष के बाद दूसरे वर्ष की घोषणा के पहले सभी किसानों ने मिलकर संसाधनों का सामूहिक उपयोग किया और लाभ हुआ। यही खेल का सार भी था। कुछ जटिल समस्याओं के समाधान भी मिलकर ही खोजे जाते है।





इसके बाद कुछ मेन्टल मॉडल्स बताये गए। डिज़ाइन थिंकिंग , पावर मैप आदि की चर्चा भी की गई। मानसिक मॉडल वास्तव में दृष्टिकोण, विश्वास, नैतिकता,अपेक्षाएं और मूल्य हैं, जो समाज से और परिवारों से मिलते है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी समस्याओं के समाधान के तरीके भी इनके आधार पर ही ढूंढता है, भले ही वे इन मॉडल से अभिज्ञ रूप से अवगत ना हो।


देखकर और करके सीखना - भाई काका फार्म का दौरा


दूसरे दिन एक फील्ड विज़िट श्री सर्वदमन पटेल जी के फार्म " भाई काका कृषि केंद्र " पर की गई। ४० एकड़ में फैले इस केंद्र में जैविक और बायो डाइनामिक तरीके से खेती की जाती है। बायोडायनामिक खेती वास्तव में रसायनों के उपयोग के बिना पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को उगाने के लिए धरती की जीवनी शक्ति के साथ खेती की जाती है। इसी पद्धति से भाई काका कृषि केंद्र में सब्जी , अनाज , फल आदि सभी उगाई जाती है। यहाँ खेती में रुचि रखने वाले लोगों को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। यहाँ डेयरी फार्म भी है, और मवेशियों के लिए चारा भी यहीं उगाया जाता है।




टिकाऊ खाद्य प्रणाली का परिचय और उस पर सघन रूप से कार्य करने की सम्भावनाओ पर चर्चा -


टिकाऊ खाद्य प्रणाली के परिचय का प्रोफसर शम्बू प्रसाद का सत्र रोचक रहा। उन्होंने मुख्यतः खाद्य प्रणाली के बारे में विचार करने पर ज़ोर दिया और खाद्य प्रणाली से टिकाऊ खाद्य प्रणाली के बारे में चर्चा की। सत्र में उन्होंने बताया कि वर्त्तमान में व्यक्तिगत किसान से परे ज़मीन और संस्थानों के परिदृश्य तक देखने की जरूरत है। कृषि संकट बड़ा है अतः कर्ज़र्माफी या यूनिवर्सल एमएसपी से समाधान नहीं हो सकता। किसानों को भी उत्पादन के बाद प्रसंस्करण, विपणन, उपभोक्ता प्राथमिकताएं आदि को देखने की ज़रुरत है। वैश्विक आकड़ों के अनुसार भी वर्त्तमान खाद्य प्रणाली टिकाऊ नहीं है। अतः सस्टेनेबल फूड सिस्टम अर्थात टिकाऊ खाद्य प्रणाली की आवश्यकता है, क्योकि -


  1. वर्त्तमान आधुनिक कृषि जलवायु परिवर्तन बढ़ा रही है।

  2. हम पर्याप्त भोजन का उत्पादन करते हैं; परन्तु समान रूप से हम इसे वितरित नहीं करते हैं।

  3. मोनोकल्चर जैव विविधता को मार रही हैं।

  4. आजीविका के एक अच्छे स्रोत के रूप में कृषि को बढ़ावा देने में वर्तमान आर्थिक और सामाजिक व्यवस्थाएँ असमर्थ हैं।




खाद्य प्रणाली परस्पर जुड़ी प्रणालियों और प्रक्रियाओं का वर्णन करती है, जो पोषण, भोजन, स्वास्थ्य,

सामुदायिक विकास और कृषि को प्रभावित करती है। वही सस्टेनेबल फूड सिस्टम (एसएफएस) सभी के लिए खाद्य सुरक्षा और पोषण इस तरह प्रदान करता है जिससे आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय आधार पर भविष्य में आने वाली पीढ़ियों को खाद्य सुरक्षा और पोषण के लिए समझौता न करना पड़े।


संक्षेप में कहा जाए तो इन बिन्दुओ पर सरकार, सामाजिक संस्थाएं और समुदाय को मिलकर संवेदनशील तरीके से उपाय सोचने होंगे। कई राज्यों ने इस दिशा में काम करते हुए जैविक खेती को बढ़ावा देना शुरू कर दिया है।

कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने समूह चर्चा के माध्यम से अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए सिस्टम्स थिंकिंग के विभिन्न तरीको का उपयोग करके उनको प्रस्तुत किया। उपरोक्त कार्यशाला का विषय जटिल था, पर सिस्टम्स थिंकिंग एप्रोच पर प्रतिभागियों की समझ निश्चित रूप से बढ़ी। सिस्टम्स थिंकिंग स्वयं में थोड़ा कठिन है, परन्तु इसके उचित उपयोग से समस्याओं का समाधान खोजा जा सकता है।


लिविंग फार्म इनकम टीम मुख्यतः लर्निंग अलायन्स अर्थात सिखने के लिए गठबंधन को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है। टीम के पास अनुभव भी है और डेटाबेस के रूप में खाद्य प्रणालियों के सम्बन्ध में ज्ञान भी। इसलिए निःसंदेह इस ज्ञान को ऐसे प्रारूपों में सरल करना महत्वपूर्ण हो जाता है जो लोगों के समझ में आए। इस दिशा में यह कार्यशाला एक सराहनीय कदम है। हालाँकि ये शुरुआत है और अभी बहुत सारा कार्य शेष है।



 

शुभा खड़के लिविंग फार्म इनकम प्रोजेक्ट, इरमा (IRMA) में प्रोग्राम और आउटरीच कन्सल्टन्ट हैं।


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