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  • Shubha Khadke, C Shambu Prasad, Abhishek Saxena

प्राकृतिक खेती के लिए सशक्त होता गठबंधन

किसान संकट, जलवायु परिवर्तन, उपभोक्ता स्वास्थ्य, भूमि क्षरण और जैव विविधता की हानि आदि कई मुद्दों के संभावित समाधान हेतु प्राकृतिक खेती ही विकल्प हो सकता है - इस उद्देश्य से 2020 में एक राष्ट्रीय गठबंधन बनाया गया और इसमें विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, चिकित्सकों, दाताओं, शिक्षाविदों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। गठबंधन का उद्देश्य राज्य एजेंसियों और किसानों के समूहों के साथ आवश्यक साझेदारी बनाने में मदद करना है ,ये अपने सदस्यों को आवश्यक ज्ञान और क्षमता वृद्धि में सहयोग भी देता है। गठबंधन के काम को आगे बढ़ाने के लिए ही स्टेट चैप्टर अर्थात राज्य गठबंधन शुरू किये गए।


राजस्थान में प्राकृतिक खेती/जैविक खेती के गठबंधन का निर्माण


राजस्थान में सहयोग का एक समृद्ध इतिहास रहा है। यहाँ कई सामाजिक संस्थायें है जो प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, आजीविका संवर्धन ,जल प्रबंधन, शिक्षा ,स्वास्थ्य , पंचायतों का सशक्तिकरण आदि में नवाचारों को आगे बढ़ाने में सक्रिय रही है। कई सामाजिक संस्थायें प्राकृतिक खेती को बढ़ाने की दिशा में भी कार्य कर रही है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि जैविक कृषि क्षेत्र और परम्परागत कृषि विकास योजना के क्रियान्वयन में राजस्थान शीर्ष पांच राज्यों में शामिल है।


राजस्थान प्राकृतिक खेती गठबंधन (RNFC) प्राकृतिक खेती के लिए राष्ट्रीय गठबंधन (NCNF) का राज्य अध्याय है। दो साल पुराने इस नेटवर्क की दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में मजबूत उपस्थिति है। राजस्थान सरकार ने 2017 में राज्य जैविक खेती नीति की घोषणा की थी,परन्तु इसको 2022 में 3 साल के लिए 600 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन के साथ घोषित जैविक खेती मिशन ने गति प्रदान की है। गठबंधन ने सीईईडब्ल्यू(CEEW) को उनके स्थायी कृषि पर नीति अध्ययन में भी सहयोग किया। गठबंधन (RNFC) प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के साथ काम कर रहा है। राजस्थान में 32 संस्थाएं है जो इस गठबंधन की सदस्य है और किसानों के साथ प्राकृतिक खेती पर काम कर रही हैं। गठबंधन ने फरवरी 2022 में अपनी पहली बैठक में पांच कार्यकारी समूहों का गठन किया जिससे गठबंधन के कार्य का विस्तार हो सके।


गठबंधन चैंपियन किसानों की पहचान करने , उनसे सीखने और राज्य स्तर पर सरकार के साथ अनुसंधान-आधारित नीति वकालत में संलग्न होने का भी प्रयास कर रहा है। RNFC शैक्षणिक संस्थानों, सार्वजनिक रूप से वित्त पोषित कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, ATMA (कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी), KVK (कृषि विज्ञान केंद्र), सामाजिक उद्यमों और नीति थिंक टैंक जैसे अन्य हितधारकों के साथ भी जुड़ा हुआ है। हालाँकि इतने सारे हितग्राहियों की प्राथमिकताएँ अलग होने से उसमे जटिलता और विविधता दोनों है परन्तु गठबंधन का खुलापन प्राकृतिक खेती पर सीखने वाले सभी हितग्राहियों को चुनौतियां के साथ अवसर भी प्रदान करता है।


राजस्थान प्राकृतिक खेती गठबंधन की वार्षिक बैठक


प्राकृतिक खेती में अधिक किसान जुड़े और उसमे आने वाली चुनौतियों का मिलकर समाधान ढूंढने के उद्देश्य से अजमेर में राजस्थान प्राकृतिक खेती गठबंधन (RNFC) के 32 भागीदारों की वार्षिक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक ने सह-शिक्षण का एक मजबूत आधार प्रदान किया। राजस्थान विविधता से भरा हुआ राज्य है पश्चिमी राजस्थान जहाँ पूरी तरह सूखा क्षेत्र है वही पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान में पानी उपलब्ध है अतः खेती करने के तरीके भी अलग - अलग है। इन क्षेत्रों की पारिस्थितिकी की चुनौतियों से या अन्य राज्यों के कार्यों और अनुभवों से सीखने के लिए इस बैठक ने एक मंच उपलब्ध कराया।


अजमेर में दिशा-आरसीडीएसएसएस के सुंदर परिसर में राजस्थान प्राकृतिक खेती गठबंधन (RNFC) के भागीदारों के नेटवर्क की दूसरी बैठक ने गठबंधन निर्माण , नए सदस्यों की भागीदारी पर निर्णय, भागीदार संस्थाओं के कार्य और अनुभव को साँझा करने , एक दूसरे से सीखने का अवसर प्रदान किया। बैठक का प्रारम्भ भागीदारों द्वारा प्राकृतिक खेती पर काम के संक्षिप्त परिचय और पिछले वर्ष के दौरान विभिन्न कार्यकारी समूहों की रिपोर्ट के साथ हुआ। इस सुनियोजित बैठक में आपसी सम्मान और सीखने के माहौल पर जोर दिया गया , बैठक में सदस्यों को विभिन्न कार्यकारी समूहों की रिपोर्टों पर आपत्ति होने पर असहमत होने एवं चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कोटा में बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) पर पांच दिवसीय सत्र और नए सदस्यों को शामिल करने की औपचारिक प्रक्रिया बैठक की कुछ प्रमुख विशेषताएं थीं। पंचायती राज विभाग के साथ ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) में प्राकृतिक खेती से संबंधित गतिविधियों को एकीकृत करने पर पंचायतों के साथ मिलकर काम करना गठबंधन की एक अनूठी विशेषता है। राज्य के 14 जिलों में 16 संगठनों के साथ छत्तीस पायलट पहल की गई है।


बैठक में इरमा (IRMA) की लिविंग फ़ार्म इनकम (LFI) प्रोजेक्ट टीम ने भी भाग लिया। LFI टीम RNFC के साथ राजस्थान में जैविक खेती को बढ़ाने के कार्य में सहयोगी है अतः LFI टीम ने क्षेत्र में खेती पर हुए नवाचारों का दस्तावेजीकरण ब्लॉग के रूप में किया है। LFI टीम ने इन्ही ब्लॉग को साझा करने के साथ किसान उत्पादक संगठनों पर उनके द्वारा किये जा रहे कामों के बारे में बताया।

बैठक के दौरान APCNF के विजय कुमार जी, MAKAAM से अर्चनाजी एवं राजस्थान जैविक खेती मिशन के राजेंद्रजी के साथ ऑनलाइन चर्चा से सदस्यों के कई महत्वपूर्ण सवालों का समाधान मिला। अर्चना ने महिला किसानों की भूमिका के बारे में बात की उन्होंने महिला किसानो के काम में पहचान , परिश्रम (प्रयास), पहुंच, प्रतिभागिता और प्राप्ति के पांच पी पर सवाल उठाने के लिए प्रोत्साहित किया। जतन ट्रस्ट के कपिल शाह का जैविक कृषि नेटवर्क पर सत्र रोचक रहा। इरमा (IRMA) से प्रोफ़ेसर शंबूप्रसाद और अभिषेक ने भारत में किसान उत्पादक संगठनों की स्थिति से अवगत कराया वही आर्गनिक फार्मर्स मार्केट (OFM), तमिलनाडु से जुड़े , तुला और रिस्टोर के संस्थापक अनन्थू द्वारा जैविक कृषि बाजारों के लिए वैकल्पिक दृष्टिकोणों को बताया गया जिसे काफी अच्छा प्रतिसाद मिला।


बैठक के अंत में आगामी योजना पर विस्तार से चर्चा हुई । सभी कार्यकारी समूहों ने अपनी अपनी कार्य योजना प्रस्तुत की।

गठबंधन की कार्यप्रणाली



नेटवर्क की एक प्रमुख विशेषता गठबंधन स्तर पर शासन करने और निर्णय लेने की जटिलता है, क्योंकि कई सदस्य नेटवर्क या गठबंधन का हिस्सा है, साथ ही कई हितधारकों से गठबंधन एक इकाई के रूप में बातचीत करता हैं। RNFC, अपनी स्थापना के बाद से, एक समतावादी व्यवस्था के रूप में विकसित हुआ है जहाँ कोई "केंद्रीय" या "कोर" संगठन नहीं है। आकार, संचालन के क्षेत्र, फंड और मानव संसाधनों की संख्या की परवाह किए बिना सभी सामाजिक संस्थाओं को समान भागीदार के रूप में माना जाता है। गठबंधन के भीतर, हालांकि कुछ पद हैं जो व्यावहारिक और परिचालन उद्देश्यों के लिए किसी विशेष व्यक्ति के साथ पहचाने जाते हैं। व्यवस्थित प्रबंधन के लिए अपेक्षाकृत लचीले 5 "कार्यकारी समूह" बनाये गए है जिनका प्रतिनिधित्व सामाजिक संस्थाओ के सदस्य करते हैं। ये कार्य समूह है - क्षमतावर्धन, संचार या कम्युनिकेशन, संघर्ष समाधान, संसाधन जुटाना,एवं अनुसंधान और वकालत जिसमे सरकार के साथ नीति सम्बन्धी चर्चा हेतु जुड़ाव शामिल है। एक सदस्य एक से अधिक कार्यकारी समूह में हो सकता है और कार्यकारी समूह का गठन करते समय विशिष्ट रुचियों और विशेषज्ञता वाले लोगों को शामिल करने का प्रयास किया गया है। व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र से कुछ बाहरी सदस्यों को भी किसी विशेष क्षेत्र में उनके ज्ञान, कौशल या अनुभव के लिए कार्यकारी समूह में शामिल किया गया है।


यदि प्राकृतिक खेती को कृषि में एक वैकल्पिक प्रतिमान का प्रतिनिधित्व करना है, तो उपयुक्त संगठनात्मक रूपों का होना महत्वपूर्ण है जो भागीदारी, विविधता को समेटने और जटिलता को आसान करने में सक्षम बनाता है। चूंकि RNFC अपनी आंतरिक क्षमताओं पर लगातार काम कर रहा है और प्रत्येक वर्ष नए भागीदारों के साथ विस्तार भी कर रहा है. परन्तु फिर भी इसे राज्य और कृषि विश्वविद्यालय के साथ जुड़ाव के लिए खुद को सक्रिय रूप से तैयार करने की आवश्यकता है। जीपीडीपी में प्राकृतिक खेती को शामिल करने और कृषि विभाग को शामिल करने से सरकार और कृषि विश्वविद्यालयों के भीतर कुछ नवोन्मेष चैंपियन की खोज की पहल को बल मिला है।


गठबंधन को सशक्त करने के लिए प्रत्येक संस्था की ताकत की पहचान की जानी चाहिए और सभी भागीदारों के साथ उसे साझा किया जाना चाहिए जिससे आपस में सीखने की प्रक्रिया को गति मिले।राज्य कृषि विभाग से राज्य स्तरीय गठबंधन हो जिससे जैविक खेती करने वाले किसानो को लाभ मिला सके। विश्वविद्यालय के सहयोग से जैविक खेती करने वाले किसानो की यात्रा का दस्तावेजीकरण भी जरुरी है साथ ही मिट्टी और मानव पर जैविक खेती के प्रभावों को मापने के लिए एक सामूहिक अध्ययन किया जाना चाहिए। उम्मीद है कि आने वाले समय में गठबंधन मजबूत होता हुआ प्राकृतिक खेती से अधिक किसानों को जोड़ सकेगा और नीति निर्धारण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


 

शुभा खड़के लिविंग फार्म इनकम (LFI) प्रोजेक्ट में एक प्रोग्राम और आउटरीच कंसलटेंट हैं।


सी शंभू प्रसाद इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल मैनेजमेंट आनंद (IRMA) में स्ट्रेटेजिक मैनेजमेंट और सामाजिक विज्ञान के प्रोफेसर हैं और LFI प्रोजेक्ट का समन्वय करते हैं।


अभिषेक सक्सेना LFI प्रोजेक्ट में रिसर्च फेलो हैं और IRMA में डॉक्टरेट शोध भी कर रहे हैं।


इस ब्लॉग का हिंदी संस्करण शुभा खड़के द्वारा लिखा गया है। अंग्रेजी संस्करण यहाँ पढ़ें

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